फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट्स को लेकर एनएमसी ने जारी की गई अधिसूचना

नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) की ओर से एक अधिसूचना जारी की गई है, जिसमें कई नए नियमों का प्रावधान किया गया है। इसे नेशनल मेडिकल कमिशन (फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट लाइसेंटशिएट) रेगुलेशंस, 2021 का नाम दिया गया है।

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New Gazette Notification for Foreign Medical Graduates

NMC द्वारा किये गए नए प्रावधान एक नजर में

  • इसमें यह प्रावधान किया गया है कि भारत में तब तक कोई भी फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट मेडिसिन की प्रैक्टिस नहीं कर सकता है, जब तक कि नियमों के अनुसार उसे यहां का स्थाई रजिस्ट्रेशन प्रदान नहीं कर दिया गया हो।
  • जो भी फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट्स भारत में स्थाई रजिस्ट्रेशन हासिल करना चाहते हैं, उनके लिए यह जरूरी कर दिया गया है कि उन्होंने विदेश में कम-से-कम 54 महीने की अवधि वाले मेडिकल कोर्स को पूरा करके डिग्री हासिल की हो।
  • साथ ही उम्मीदवारों के लिए यह भी जरूरी है कि उन्होंने उसी फॉरेन मेडिकल कॉलेज या यूनिवर्सिटी से कम-से-कम 12 महीने की इंटर्नशिप पूरी कर ली हो।
  • इसके अलावा उनके पास अंग्रेजी भाषा में विदेश से मेडिकल की पढ़ाई की डिग्री होनी चाहिए।
  • जिस देश में स्टूडेंट्स ने मेडिकल की पढ़ाई की है, उस देश में वहां के प्रोफेशनल रेगुलेटरी बॉडी के साथ उनका रजिस्टर्ड होना जरूरी है। या फिर उस देश में उन्हें प्रैक्टिस करने के लिए लाइसेंस बिल्कुल उन्हीं मानकों पर खरा उतरने के आधार पर मिला होना चाहिए, जिस आधार पर उस देश के नागरिकों को मेडिसिन की प्रैक्टिस के लिए वहां लाइसेंस प्रदान किया जाता है।
  • स्टूडेंट्स का भारत में एनएमसी के समक्ष आवेदन करने के पश्चात और कमीशन की तरफ से लिए जाने वाले नेशनल एग्जिट टेस्ट में उत्तीर्ण होने के बाद भारत में भी अनिवार्य रूप से कम-से-कम 12 महीने की इंटर्नशिप करना जरूरी है।

इन पर लागू नहीं होंगे नए प्रावधान

  • अधिसूचना में बताया गया है कि नए नियम उन फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट्स पर लागू नहीं होंगे, जिन्होंने इन नए नियमों के लागू होने से पहले ही फॉरेन मेडिकल डिग्री या प्राइमरी क्वालिफिकेशन को हासिल कर लिया है।
  • इसके अलावा जो उम्मीदवार नियमों के लागू होने के पहले से ही विदेशी संस्थानों में अपनी पढ़ाई कर रहे हैं, उन पर भी नए नियम लागू नहीं होंगे।
  • यदि नेशनल मेडिकल कमीशन या फिर केंद्र सरकार की तरफ से कुछ फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट्स को छूट दी गई है, तो वे भी इन नियमों के दायरे में नहीं आएंगे।
  • नए प्रावधान ये भी हैं
  • अधिसूचना में बताया गया है कि भारत के बाहर मेडिकल की डिग्री जो स्टूडेंट्स हासिल कर रहे हैं, उन्हें मिलने वाली डिग्री को भारत में तभी वैध माना जाएगा, जब भारत में पढ़ाए जाने वाले बैचलर ऑफ मेडिसिन और बैचलर ऑफ सर्जरी के उनके द्वारा पढ़े जाने वाले कोर्स समकक्ष होंगे।
  • साथ ही 12 महीने की इंटर्नशिप तो जरूरी है ही, इसके अलावा कई विषय भी इस अधिसूचना में बताए गए हैं, जिनमें स्टूडेंट्स का हाथ साफ होना जरूरी है। इनमें Community  Medicine,  General  Medicine,  Psychiatry, Paediatrics,  General  Surgery,  Anaesthesia,  Obstetrics  and  Gynaecology,  Orthopaedics,  Otorhinolaryngology, Ophthalmology,  Dermatology,  Emergency  or  Casualty  services,  lab  services और उनकी  sub-specialties शामिल हैं।
  • नई अधिसूचना में यह साफ कर दिया गया है कि जो फॉरेन मेडिकल ग्रैजुएट्स हैं, उन्हें उसी संस्थान या देश से इंटर्नशिप भी करनी होगी, जहां पर कि उन्होंने पढ़ाई की है। भारत में या फिर पढ़ाई करने वाले देश के अलावा किसी अन्य देश में की गई इंटर्नशिप या ट्रेनिंग मान्य नहीं होगी।
  • इसके अलावा जिस दिन स्टूडेंट्स ने कोर्स को ज्वाइन किया है, उस दिन से 10 वर्ष के अंदर उन्हें फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएशन कोर्स को पूरा करना पड़ेगा।

और अंत में
इस तरह से विदेश में एमबीबीएस की पढ़ाई की चाहत रखने वाले स्टूडेंट्स यदि नेशनल मेडिकल कमीशन की नई अधिसूचना को ध्यान में रखते हुए आवेदन करते हैं, तो उन्हें किसी तरह की दिक्कतों का सामना नहीं करना पड़ेगा। हालांकि अभी यह देखना भी बाकी है कि स्टूडेंट्स NMC की नई अधिसूचना पर किस तरह से प्रतिक्रिया देते हैं।

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