रूस में एमबीबीएस की अवधि 6 वर्षों की होती है। यहां इस पाठ्यक्रम की पढ़ाई जनरल मेडिसिन में स्पेशलिस्ट बैचलर्स डिग्री के रूप में होती है। हाल के वर्षों में यह भारत के उन भावी डॉक्टरों के लिए एक महत्वपूर्ण विकल्प बनकर उभरा है, जिन्हें एमबीबीएस की पढ़ाई के लिए भारत के अच्छे मेडिकल कॉलेजों में दाखिला नहीं मिल पाया है। आपको यह जानकर खुशी होगी कि रूस के 53 विश्वविद्यालय ऐसे हैं, जिन्हें एमबीबीएस की डिग्री प्रदान करने के लिए भारत के नेशनल मेडिकल काउंसिल (NMC) से मंजूरी मिली हुई है। इसका मतलब यह हुआ कि विदेश में एमबीबीएस की पढ़ाई करके भारत में आप प्रैक्टिस कर सकते हैं। एनएमसी का नियम यह है कि जो स्टूडेंट्स विदेश से एमबीबीएस की डिग्री हासिल करने जा रहे हैं, उनका नीट (NEET) उत्तीर्ण होना जरूरी है।
अधिकतर रूसी विश्वविद्यालयों में दाखिले के लिए आपको TOEFL या IELTS जैसी किसी भी भाषा वाली परीक्षा को पास करने की जरूरत नहीं पड़ती है। हालांकि, यह जरूरी है कि आपने CBSE, ISC या 12वीं की परीक्षा PCB के साथ न्यूनतम 50 प्रतिशत अंकों के साथ उत्तीर्ण कर ली हो। रूस के कई मशहूर विश्वविद्यालयों की ट्यूशन फीस 1 लाख 93 हजार से 8 लाख 74 हजार रूसी रूबल वार्षिक है। भारतीय स्टूडेंट्स के लिए यह लगभग 1.8 लाख रुपये से 8.5 लाख रुपये सालाना हो जाता है। एक बार यहां से ग्रेजुएट हो जाने के बाद रूस की एमबीबीएस डिग्री के साथ भारत में लीगल प्रैक्टिस करने के लिए फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट्स एग्जामिनेशन (FMGE) को उत्तीर्ण करना आवश्यक हो जाता है।
रूस में कई मशहूर विश्वविद्यालय भारत के नेशनल मेडिकल काउंसिल से मान्यता प्राप्त एमबीबीएस की डिग्री प्रदान कर रहे हैं, जिनकी जानकारी निम्नवत है:-
| यूनिवर्सिटी | सालाना शुल्क (रूसी रूबल में) |
| फार ईस्टर्न मेडिकल यूनिवर्सिटी | 2,95,000 |
| कज़ान फ़ेडरल यूनिवर्सिटी | 3,91,000 |
| फर्स्ट मास्को स्टेट मेडिकल यूनिवर्सिटी | 8,74,206 |
| नोवोसिबिर्स्क स्टेट यूनिवर्सिटी | 4,81,554 |
| इंगुश स्टेट यूनिवर्सिटी | 2,40,000 |
| बश्किर स्टेट मेडिकल यूनिवर्सिटी | 2,72,500 |
| कज़ान स्टेट मेडिकल यूनिवर्सिटी | 3,60,000 |
| क्रीमियन फ़ेडरल यूनिवर्सिटी | 2,50,000 |
| वोल्गोग्राद स्टेट मेडिकल यूनिवर्सिटी | 4,30,000 |
| कुबान स्टेट मेडिकल यूनिवर्सिटी | 1,97,000 |
कोविड-19 की वजह से इस वक्त सभी कक्षाएं ऑनलाइन ही चल रही हैं, लेकिन नए सत्र के यूनिवर्सिटी की ओर से आवेदन अब भी स्वीकार किये जा रहे हैं। मेडिकल के क्षेत्र में करियर बनाने वालों के लिए रूस पढ़ाई का एक प्रमुख केंद्र बनता जा रहा है, क्योंकि विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के शीर्ष 100 मेडिकल स्कूलों में इसके लगभग 30 स्कूल शामिल हैं। इसके साथ ही न्यूनतम शुल्क की वजह से कम कीमत पर विदेशों में पढ़ाई करके अपने सपने को साकार करना स्टूडेंट्स के लिए संभव हो जाता है।
अगस्त 2020 तक के आंकड़ों के मुताबिक रूस के करीब 20 विश्वविद्यालयों में लगभग 4,000 भारतीय स्टूडेंट्स मेडिसिन की पढ़ाई कर रहे हैं। एमबीबीएस स्टूडेंट्स का पढ़ाई के लिए रूस की ओर झुकाव होने के पीछे कई वजहें मौजूद हैं, जो निम्नवत हैं:-
रूसी विश्वविद्यालयों में भारतीय छात्रों के लिए दाखिले की प्रक्रिया बहुत ही आसान है। जिस भी स्टूडेंट के पास अनिवार्य विषय के रूप में जीव विज्ञान और रसायन विज्ञान के साथ एक सीनियर सेकेंडरी स्कूल सर्टिफिकेट है‚ वे इसके लिए आवेदन कर सकते हैं। रूस के कई विश्वविद्यालय तो ऐसे भी हैं‚ जहां प्रवेश पाने के लिए स्टूडेंट्स को न्यूनतम प्रतिशत भी नहीं चाहिए। इसलिए यदि विदेश में अध्ययन करने की योजना आप बना रहे हैं‚ तो एमबीबीएस की डिग्री हासिल करने के लिए निश्चित तौर पर रूस ही सबसे बेहतर विकल्प है।
एमबीबीएस पाठ्यक्रम में दाखिल पाने के लिए स्टूडेंट्स को कुछ रूसी विश्वविद्यालयों की ओर से ली जाने वाली प्रवेश परीक्षा में भी शामिल होना पड़ सकता है। हालांकि, ये परीक्षाएं बाकी मेडिकल परीक्षाओं जैसे कि NEET और MCAT के जैसे ज्यादा प्रतिस्पर्धी नहीं होती हैं। जीव विज्ञान, रसायन विज्ञान और अंग्रेजी जैसे विषयों की स्टूडेंट्स को कितनी बुनियादी समझ है‚ इस की जांच करने के लिए प्रश्न तैयार किये जाते हैं।
भारतीय स्टूडेंट्स सीधे विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर जाकर यहां दाखिले के लिए आवेदन कर सकते हैं। जब आप ऑनलाइन आवेदन कर देते हैं‚ तो संभव है कि आपको इसे डाउनलोड भी करना हो और इसे अपने आधिकारिक हस्ताक्षर के साथ सभी जरूरी दस्तावेजों के साथ जमा भी करना पड़े। वैसे‚ सभी विश्वविद्यालयों में ऐसा नहीं होता है।
रूस के अधिकतर विश्वविद्यालय ऐसे हैं‚ जहां आवेदन करने के लिए समय सीमा प्रायः जुलाई और अगस्त में ही रहती है।
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