विदेशों में एमबीबीएस की पढ़ाई की जब हम बात करते हैं, तो जिन देशों का नाम प्रमुखता से सामने आता है, उनमें से एक रुस भी है। रुस में एमबीबीएस की पढ़ाई करना भारतीय स्टूडेंट्स के लिए कई तरीके से फायदेमंद होता है। ऐसे भारतीय स्टूडेंट्स, जो मेडिकल के क्षेत्र में अपना कॅरियर बनाना चाहते हैं, लेकिन नीट (NEET) में अच्छा स्कोर नहीं कर पाने की वजह से उन्हें भारत में सरकारी मेडिकल कॉलेजों में दाखिला नहीं मिल पा रहा है और यहां के निजी मेडिकल कॉलेजों की फीस भर पाना उनके लिए मुमकिन नहीं है, वे रुस में एमबीबीएस की पढ़ाई करके डॉक्टर बनने के अपने सपने को आसानी से साकार कर सकते हैं। इस लेख में हम आपको रुस में एमबीबीएस की पढ़ाई से मिलने वाले फायदों के बारे में बता रहे हैं।

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सबसे पहले थोड़ा रुस के बारे में जान लें

जाहिर सी बात है कि रुस में एमबीबीएस की पढ़ाई करने की यदि आप सोच रहे हैं, तो इससे पहले आपके लिए रुस को जान लेना बहुत ही जरूरी है। आपको बता दें कि रुस एक ऐसा देश है, जो अपनी लाजवाब शिक्षा प्रणाली के लिए जाना जाता है। यहां की साक्षरता दर भी 99.73% है और दुनिया में यह सबसे ज्यादा साक्षर देशों में से एक है. रुस में मिलने वाली हाई क्वालिटी की शिक्षा और कम शुल्क की वजह से बड़ी संख्या में अंतरराष्ट्रीय स्टूडेंट्स यहां एमबीबीएस की पढ़ाई के लिए खिंचे चले आते हैं। यहां के कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में बिल्कुल यूरोपीय स्तर की शिक्षा प्रदान की जाती है। इसके अलावा रुस में एमबीबीएस के पाठ्यक्रम में भी नई खोजें और जरूरतों के मुताबिक बदलाव होते रहते हैं।

क्यों करें एमबीबीएस की पढ़ाई के लिए रुस का चुनाव?

भारत में ऐसे स्टूडेंट्स की कमी नहीं है, जो मेडिकल की पढ़ाई करके डॉक्टर बनने का सपना संजो रहे हैं। ऐसे में यदि वे एमबीबीएस की पढ़ाई के लिए रुस का चयन करते हैं, तो यह उनके अपने सपनों की दिशा में बढ़ने के लिए एक बड़ा ही सरल साबित हो सकता है, क्योंकि रुस एक ऐसा देश है, जहां पर कि मेडिकल यूनिवर्सिटीज और मेडिकल कॉलेजों में बहुत ही ऊंचे स्तर की शिक्षा दी जाती है। सबसे खास बात यह है कि रुस में प्रदान की जाने वाली एमबीबीएस की डिग्री को भारत के नेशनल मेडिकल कमिशन यानी कि NMC की तरफ से भी मान्यता प्राप्त है। रुस में ली जाने वाली एमबीबीएस की डिग्री को केवल भारत ही नहीं, बल्कि दुनिया भर में मान्यता मिली हुई है। यही वजह है कि रुस में एमबीबीएस भारत में स्टूडेंट्स के बीच तेजी से लोकप्रिय होता जा रहा है।

रुस में एमबीबीएस की पढ़ाई करने की प्रमुख वजहें

- जो भारतीय स्टूडेंट्स रुस में एमबीबीएस की पढ़ाई करना चाहते हैं, उन्हें यहां की यूनिवर्सिटीज एवं कॉलेजों में एडमिशन लेने के लिए किसी तरह की प्रवेश परीक्षा नहीं देनी पड़ती है। स्टूडेंट्स ने जो 12वीं में अंक प्राप्त किए हैं और नीट में जो स्कोर उन्हें मिला है, उसके आधार पर ही उन्हें रुस में एमबीबीएस में दाखिला मिल जाता है।
- रुस की यूनिवर्सिटीज की यह खासियत है कि यहां भारतीय विश्वविद्यालयों की तुलना में एमबीबीएस की पढ़ाई के लिए बहुत ही कम फीस देनी पड़ती है। यहां सालाना एमबीबीएस की पढ़ाई पर 4 से 8 लाख रुपए का खर्च आता है। इतना ही नहीं, यहां पर रहने का खर्च भी ज्यादा नहीं है।
- रुस में एमबीबीएस की पढ़ाई करना भारतीय स्टूडेंट्स के लिए इस तरीके से भी लाभकारी साबित हो सकता है कि रुस अपने यहां पढ़ाई के लिए आने वाले विदेशी स्टूडेंट्स को एमबीबीएस के लिए कई तरह की स्कॉलरशिप भी ऑफर करता है। इन स्कॉलरशिप की मदद से स्टूडेंट्स आसानी से हर साल अपनी पढ़ाई जारी रख सकते हैं।
- भारतीय स्टूडेंट्स जब रुस में एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहे होते हैं, तो उसी दौरान उन्हें भारत में NMC की तरफ से लिए जाने वाले स्क्रीनिंग टेस्ट के लिए भी तैयार किया जाता है। इस तरह से रुस में एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी कर लेने के बाद जब भारतीय स्टूडेंट्स स्वदेश लौटकर इस स्क्रीनिंग टेस्ट में शामिल होते हैं, तो इसमें उनकी सफलता की गुंजाइश बढ़ जाती है। इससे उन्हें बिना कोई अतिरिक्त पैसे खर्च किए भारत में प्रैक्टिस करने का अवसर मिल जाता है।

- रुस एक ऐसा देश है, जहां पर पढ़ाई करने के लिए दुनियाभर के बहुत से देशों से स्टूडेंट्स पहुंचते हैं। ऐसे में यहां स्टूडेंट्स को इन अलग-अलग देशों से आने वाले स्टूडेंट्स से घुलमिल कर तरह-तरह की भाषाओं को तो सीखने का अवसर मिलता ही है, साथ में रुस में एमबीबीएस की पढ़ाई के दौरान भारतीय स्टूडेंट्स को अलग-अलग देशों की संस्कृति और वहां के वातावरण को भी समझने का अवसर मिल पाता है।
- रुस में प्रदान की जाने वाली MBBS की डिग्री को UNESCO, WHO, NMC, यूरोपीय संघ और कई अन्य अंतर्राष्ट्रीय निकायों से मान्यता मिली हुई है।
- रुस में एमबीबीएस की पढ़ाई के दौरान भारतीय स्टूडेंट्स को यह अवसर भी मिलता है कि वे डबल डिप्लोमा हासिल कर लें। वह इसलिए कि रुस में कई तरह के मेडिकल प्रोग्राम्स विदेशों के अन्य विश्वविद्यालयों के साथ भी संयुक्त रूप से चलाए जाते हैं, जिनका हिस्सा बनकर स्टूडेंट्स के लिए डबल डिप्लोमा लेना आसान हो जाता है।
- रुस में एमबीबीएस की पढ़ाई करने वाले भारतीय स्टूडेंट्स के लिए भाषा की समस्या बिल्कुल भी नहीं होती है, क्योंकि यहां की अधिकतर यूनिवर्सिटीज में विदेशी स्टूडेंट्स के लिए एमबीबीएस की पढ़ाई अंग्रेजी में ही होती है।
- भारतीय स्टूडेंट्स के लिए रुस में एमबीबीएस की पढ़ाई करना इसलिए भी एक अच्छा विकल्प साबित हो सकता है कि रुस की मेडिकल यूनिवर्सिटीज एवं कॉलेजों में हाई क्वालिटी उपकरण इस्तेमाल में लाए जाते हैं। इसके अलावा नई-नई तकनीकें भी प्रयोगशालाओं में उपलब्ध कराई जाती हैं, ताकि स्टूडेंट्स लेटेस्ट जानकारी हासिल कर सकें। इसके अलावा रुस के विश्वविद्यालयों में जो हॉस्टल मौजूद हैं, वहां ज्यादा फीस भी नहीं देनी पड़ती है।

और अंत में

इस तरह से रुस में एमबीबीएस की पढ़ाई करना भारतीय स्टूडेंट्स के लिए न केवल आसान, बल्कि बड़ा ही किफायती भी होता है। साथ में रुस में मिलने वाली एमबीबीएस की डिग्री के आधार पर वे आसानी से भारत में प्रैक्टिस कर सकते हैं और एक डॉक्टर बनकर अपने कॅरियर में नई ऊंचाइयों को छू सकते हैं।

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