बीते वर्ष 2020 में लगभग 15.9 लाख मेडिकल के उम्मीदवारों ने सिर्फ 67 हजार मेडिकल सीटों के लिए NEET की परीक्षा दी थी। यही वजह थी कि उम्मीदवारों के लिए अपने लिए मेडिकल की एक ही सीट सुरक्षित करना बहुत ही कठिन हो गया था। मेडिकल की सीटों और उम्मीदवारों के बीच का अनुपात इस बार सबसे ज्यादा रहा था। हम बहुत ही जल्द यह जानकर मोटा-मोटी एक आईडिया ले सकते हैं कि वर्ष 2020 में केवल 5 फीसदी मेडिकल स्टूडेंट्स ने ही मेडिकल सीट ली थी। अलग-अलग तरह के कोटा, बहुत ही महंगे फीस स्ट्रक्चर और यूनिवर्सिटी में होने वाली रैगिंग के तस्वीर में आने के बाद मेडिकल उम्मीदवारों के लिए परिस्थितियां बहुत ही कठिन हो गई थीं। ये कुछ ऐसी बाधाएं थीं, जिनकी वजह से 10,000वीं रैंक के अंदर आने के बाद मेडिकल उम्मीदवारों के लिए मेडिकल सीट पाना बहुत ही मुश्किल हो गया था।

आर्थिक रूप से मजबूत बैकग्राउंड वाले कई स्टूडेंट्स को मेडिकल की सीट मिल गई, लेकिन कई स्टूडेंट्स जिन्होंने NEET में 570 से भी ज्यादा अंक पाए थे, उन्हें सीट नहीं मिल पाई। इस तरह की परिस्थितियां होने से न केवल स्टूडेंट्स का आत्मविश्वास टूट जाता है, बल्कि उन पर सामाजिक दबाव का भी बहुत बड़ा वजन आ जाता है। इस तरह के मामलों में विकल्प एक ही नजर आता है और वह है विदेशों से एमबीबीएस की पढ़ाई करना। यदि हम वर्ष 2020 से 21 के दौरान सबसे अच्छे मेडिकल डेस्टिनेशंस की बात करें, तो इनमें किर्गिस्तान, कजाकिस्तान, फिलीपींस, रुस और यूक्रेन जैसे देश लिस्ट में टॉप पोजीशन में हैं। फिर भी यदि हम इनमें से भी दो सबसे अच्छी जगहों को चुनते हैं, तो यूक्रेन और चीन सबसे पॉपुलर मेडिकल डेस्टिनेशंस के रूप में हमारे सामने आते हैं। वर्ष 2019 में NMC (नेशनल मेडिकल कमिशन) की ओर से चीन के लिए सीटों की संख्या घटा दी गई थी। साथ ही कोरोनावायरस की वजह से यहां मेडिकल की डिमांड बुरी तरीके से क्रैश होकर जमीन पर आ गिरी थी। महामारी की वजह से स्टूडेंट्स चीन के बारे में नहीं सोच रहे हैं। तो ऐसे में निश्चित रूप से वर्ष 2020-21 के लिए यूक्रेन सबसे पसंदीदा जगह है।
इस बारे में आगे बात करने से पहले हमें कुछ प्रमुख विशेषताओं पर नजर डालनी चाहिए, जिनका उल्लेख हम नीचे कर रहे हैं:-
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