एनएमसी ने विदेश से डॉक्टरी की पढ़ाई करने वाले विद्यार्थियों को दी अब पूरी छूट

जयपुर
विदेश से डॉक्टरी की पढ़ाई करने वाले विद्यार्थियों के लिए राहतभरी खबर है। एनएमसी ने अब विदेश से डॉक्टरी की पढ़ाई करने वाले विद्यार्थियों को एफएमजीई 2002 एक्ट के समांतर नियम को ही वरीयता दी है और एनएमसी ने अपनी साइट से 430 से अधिक कॉलेजों की सूची हटा दी है। ऐसे में अब देश के विद्यार्थी दुनिया के 100 से ज्यादा देशों के 500 से ज्यादा कॉलेजों में डॉक्टरी की पढ़ाई के लिए प्रवेश ले सकेंगे। लेकिन इससे विद्यार्थियों की थोड़ी मुसीबत भी बढ़ी है कि उनको कॉलेजों की मान्यता सहित अन्य जानकारी अपने स्तर पर ही जुटानी होगी। अब तक विभिन्न दूतावासों की ओर से हर साल मेडिकल कॉलेजों की सूची अपडेट की जाती थी। लेकिन अब इस तरह की सूची दूतावासों की ओर से भी जारी नहीं की जाएगी।
नीट की अनिवार्यता जारी रहेगी
विदेश से डॉक्टरी की पढ़ाई के लिए नीट की अनिवार्यता जारी रहेगी। एक बार नीट पास करने पर प्रमाण पत्र तीन साल के लिए वैध रहेगा। इस प्रमाण पत्र के जरिए वह किसी भी कॉलेज में दाखिला ले सकेगा।
दो नियमों की वजह से बढ़ा क्रेज:
1. कोर्स पूरा करने के बाद कॉमन परीक्षा: एनएमसी ने अब डॉक्टरी की पढ़ाई पूरी करने के बाद कॉमन परीक्षा लेने की घोषणा की है। ऐसे में दुनिया के किसी भी देश से डॉक्टरी की पढ़ाई करने के बाद यह परीक्षा देनी होगी। ऐसे में कोरोनाकाल के बाद भी विद्यार्थियों में क्रेज बढ़ा है।
2. सभी देशों के लिए नीट अनिवार्य: सभी देशों में मेडिकल की पढ़ाई के लिए नीट अनिवार्य है। ऐसे में नीट पास करने वालों के लिए देश के साथ अन्य देशों में भी पढ़ाई के रास्ते खुले है। इससे भी अब टॉपर विद्यार्थी भी दुनिया के अन्य देशों में प्रवेश लेने लगे है।
इनका कहना है
एनएमसी के नए निर्देशों से देश के विद्यार्थियों को काफी राहत मिलेगी। इससे अब देश के विद्यार्थी कही भी पढ़ाई कर सकेंगे। लेकिन छात्रों एवं अभिभावकों को ऐसे मे ज्यादा सतर्क रहना होगा एवं उन्हें विदेश मे केवल ऐसे संस्थानों को चुनना चाहिए जो सरकारी हो एवं पूर्व में छात्रों को बैच पास आउट हो।
वेद प्रकाश बेनीवाल, एक्सपर्ट, जयपुर।
© 2026 Jagvimal Consultants & Management Services (P) Ltd.