FMGL रेगुलेशंस 2021 के प्रकाशित होने के पहले से ही फिलीपींस में जो भारतीय मेडिकल स्टूडेंट्स बीएस कोर्स की पढ़ाई कर रहे हैं और जिन्होंने विशेष राहत की मांग की है, उनके आवेदन पर नेशनल मेडिकल कमिशन ने विचार किया है।

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2. ऐसा देखा गया है कि फिलीपींस में BS और MD दो अलग-अलग कोर्स हैं। BS कोर्स को एमबीबीएस के बराबर नहीं रखा जा सकता है। इसलिए 18 नवंबर, 2021 को गजट नोटिफिकेशन जारी होने के बाद जिन स्टूडेंट्स ने ऐसे किसी भी विदेशी मेडिकल कोर्स में एडमिशन लिया है, जिसे कि भारत में एमबीबीएस कोर्स के बराबर मान्यता नहीं दी जा सकती, उन्हें भारत में मेडिसिन की प्रैक्टिस करने हेतु रजिस्ट्रेशन पाने के योग्य नहीं माना जा सकता है। हालांकि, वैसे स्टूडेंट्स, जिन्होंने कि FMGL रेगुलेशंस 2021 के आने से पहले ही फिलीपींस में एमडी कोर्स में एडमिशन ले लिया था, उन्हें बाकी शर्तों को पूरा करने पर रजिस्ट्रेशन के योग्य मान लिया जाएगा।

3. ब्रिजिंग बीएस कोर्स फिलीपींस में विज्ञान और शोध के क्षेत्र में कोर्सेज को ज्वाइन करने वाले उम्मीदवारों के लिए बैचलर ऑफ साइंस का एक कोर्स है। इस कोर्स में बायोलॉजी के वही विषय शामिल हैं, जो कि भारत में 11वीं और 12वीं में होते हैं। फिलीपींस में BS कोर्स एक प्री-मेडिकल कोर्स है, जिसे पूरा कर लेने के बाद स्टूडेंट्स को MD कोर्स में दाखिला लेने के लिए NMAT एग्जामिनेशन में हिस्सा लेना पड़ता है। यह एमडी कोर्स ग्रेजुएट या प्राइमरी मेडिकल कोर्स होता है, जो कि एमबीबीएस के बराबर होता है और इसकी अवधि 4 साल की होती है। इसमें पैटर्न यह है कि BS कोर्स के बाद MD कोर्स स्टूडेंट्स को करना होता है। यहां जिस BS कोर्स की बात की जा रही है, इसमें स्टूडेंट्स को प्री-क्लिनिकल विषय जैसे कि एनाटॉमी, बायोकेमिस्ट्री, बायोफिजिक्स, माइक्रोबायोलॉजी आदि नहीं पढ़ाए जाते हैं। इनकी जगह पर उन्हें बायोलॉजी, साइकोलॉजी आदि विषय पढ़ने पड़ते हैं, जो कि भारत में 12वीं के बराबर होते हैं। भारतीय शिक्षा के संदर्भ में देखें तो BS कोर्स एक बेसिक डिग्री कोर्स है, जो कि ग्रेजुएट या प्राइमरी मेडिकल कोर्स शुरू करने से पहले किया जाता है। ऐसे कर लेने भर से कोई भी स्टूडेंट भारत में एमबीबीएस कोर्स में दाखिला लेने के काबिल नहीं बन जाता है।

4. ग्रैजुएट मेडिकल एजुकेशन रेगुलेशंस 1997 यह कहता है कि MBBS कोर्स में एडमिशन के लिए जरूरी काउंसलिंग के योग्य बनने के लिए किसी भी स्टूडेंट के लिए NEET-UG एग्जामिनेशन को क्वालीफाई करना जरूरी है और NEET-UG में वही स्टूडेंट्स हिस्सा ले सकते हैं, जिन्होंने कि अपने पिछले 2 वर्षों की स्कूल की पढ़ाई यानी की 11वीं और 12वीं की पढ़ाई रेगुलर तरीके से की हो और उन्होंने फिजिक्स, केमिस्ट्री व बायोलॉजी विषयों को पढ़ा हो। इसका मतलब यह हुआ कि भारत में जिन स्टूडेंट्स ने 11वीं और 12वीं की पढ़ाई कर ली है और उसके बाद NEET-UG भी क्वालीफाई कर लिया है, वे यदि किसी फॉरेन मेडिकल इंस्टिट्यूट में BS कोर्स में एडमिशन लेते हैं, जो कि फिलीपींस में ग्रेजुएट या प्राइमरी मेडिकल कोर्स में एडमिशन लेने के लिए जरूरी है, इसमें एडमिशन लेकर वास्तव में उन्हें किसी भी तरह का कोई अतिरिक्त ज्ञान नहीं मिलने वाला है। इसलिए फिलीपींस में ग्रेजुएट या प्राइमरी मेडिकल कोर्स में BS कोर्स की अवधि को नहीं गिना जा सकता है। साथ ही रेगुलेशंस किसी एक देश को ध्यान में रखकर नहीं बनाए गए या इसके जरिए निर्देश नहीं दिए गए हैं, बल्कि ये सभी फॉरेन मेडिकल ग्रैजुएट्स के लिए हैं और इनका एक मात्र उद्देश्य भारत में डॉक्टरों की शिक्षा एवं गुणवत्ता के ऊंचे स्टैंडर्ड को कायम रखना है।

5. रेगुलेटरी अथॉरिटी के तौर पर नेशनल मेडिकल कमिशन हमेशा भारत में मेडिकल शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधा की गुणवत्ता को बढ़ाने के लिए और साथ में भारत में मेडिसिन की पढ़ाई करके मेडिसिन की प्रैक्टिस करने के लिए इच्छुक सभी उम्मीदवारों को बराबर और उचित मौके देने के लिए हमेशा प्रतिबद्ध है। चूंकि, मेडिसिन की प्रेक्टिस करने में इंसानों की जान का खतरा भी होता है, इसलिए कमिशन भारत में मेडिकल एजुकेशन के ऊंचे स्टैंडर्ड और इसकी गुणवत्ता से बिल्कुल भी समझौता नहीं कर सकता है।

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