जो भारतीय स्टूडेंट्स मेडिकल की पढ़ाई करने के लिए विदेश जाते हैं, उनके लिए यह जानना बहुत ही जरूरी हो गया है कि ऐसे कौन-कौन से देश हैं, जो उनके यहां मेडिकल की पढ़ाई पूरी कर लेने के बाद स्टूडेंट्स को वहां रजिस्ट्रेशन करने का या फिर प्रैक्टिस करने का लाइसेंस प्रदान करते हैं।

रूस

सबसे पहले हम शुरुआत रूस से करते हैं। रूस में जो स्टूडेंट्स मेडिकल की पढ़ाई करने के लिए जाते हैं, वहां डिग्री पूरी कर लेने के बाद उन्हें लाइसेंस मिल सकता है, लेकिन इसके लिए वहां जो स्थानीय स्तर पर अथॉरिटीज द्वारा परीक्षा ली जाती है, उसमें उनका पास होना जरूरी होता है। यह बात आपको अच्छी तरह से समझ लेनी चाहिए कि किसी भी देश में ली जाने वाली परीक्षा आसान नहीं होती है। इसके अलावा यह भी जरूरी है कि रूसी भाषा में आप पूरी तरीके से ट्रेंड हो जाएं। कहने का मतलब यह है कि आप रूसी भाषा में लिख सकें। आप रूसी भाषा में पढ़ सकें और आप रूसी भाषा में बोल भी सकें। इसके बाद ही आपका वहां इस परीक्षा को पास करना संभव होगा। लेकिन यह चीज अच्छी है कि आखिरकार रूस में आपको डिग्री लेने के बाद वहां एग्जाम पास करने पर लाइसेंस मिल ही जाता है।

चीन

रूस के बाद जो देश आता है, वह है चीन। चीन में भी यह बहुत ही जरूरी है कि चीनी लैंग्वेज पर आपकी बहुत ही अच्छी पकड़ हो। जब चाइनीज लैंग्वेज पर आप अच्छी तरह से कमांड कर लेंगे, उसके बाद ही वहां पर आपको प्रेक्टिस करने का लाइसेंस मिल सकता है। फॉरेन मेडिकल ग्रैजुएट्स को चीन भी अपने यहां लाइसेंस प्रदान करता है। वहां पर यदि आप लाइसेंसिंग एग्जाम को पास कर लें तो इसके बाद आप वहां प्रैक्टिस करने के लिए लाइसेंस हासिल कर सकते हैं।

बांग्लादेश

इस मामले में तीसरे नंबर पर जो देश हम आपको बता रहे हैं वह बांग्लादेश है। बांग्लादेश में मेडिकल की पढ़ाई पूरी करके डिग्री हासिल कर लेने के बाद सभी स्टूडेंट्स को रजिस्ट्रेशन तो मिल जाता है, लेकिन प्रैक्टिस करने का लाइसेंस वहां नहीं दिया जाता है। वहां मेडिकल स्टूडेंट्स को जो डिग्री प्रदान की जाती है, उसमें साफ तौर पर यह उल्लेख कर दिया जाता है कि आप यहां प्रैक्टिस नहीं कर सकते हैं।

नेपाल

इसके बाद हम जिस देश के बारे में बात कर रहे हैं, वह नेपाल है। नेपाल भी भारत का पड़ोसी देश है। यहां भी बिल्कुल बांग्लादेश जैसी ही स्थिति है। यहां जब आप मेडिकल की एजुकेशन पूरी कर लेते हैं और डिग्री हासिल कर लेते हैं, तो इसके बाद वहां जो लाइसेंसिंग एग्जाम लिया जाता है, उसमें आप शामिल नहीं हो सकते हैं, क्योंकि विदेशियों को नेपाल तभी लाइसेंसिंग एग्जाम में शामिल होने की अनुमति देता है, जब आपके पास जिस देश से आप नाता रखते हैं, उस देश में प्रैक्टिस करने का लाइसेंस हो, मगर दिक्कत यह है कि नेपाल से यदि आप डिग्री पूरी करते हैं, तो आपको NExT 1 में शामिल होने की अनुमति नहीं मिलेगी, क्योंकि वे नेपाल में प्रैक्टिस करने का लाइसेंस आपसे मांगेंगे और नेपाल के अंदर आपको वहां के लाइसेंसिंग एग्जाम में बैठने की अनुमति नहीं दी जाएगी, क्योंकि भारत में आपके पास रजिस्ट्रेशन नहीं है।

फिलीपींस

अब हम आपको जिस देश के बारे में बताने जा रहे हैं, वह देश है फिलीपींस। फिलीपींस में उनके यहां मौजूद अथॉरिटीज का सिस्टम यह है कि यदि फिलीपींस के डॉक्टरों को हमारे देश यानी कि भारत में प्रैक्टिस करने की अनुमति दी जाती है, तभी वे भारतीय मेडिकल स्टूडेंट्स को वहां प्रैक्टिस करने के लिए लाइसेंस प्रदान करेंगे। इस तरह से दुनिया के जिन-जिन देशों में फिलीपींस के लोगों को प्रैक्टिस करने की अनुमति दी जाती है, केवल उन्हीं देशों के मेडिकल स्टूडेंट्स को फिलीपींस अपने यहां रजिस्ट्रेशन देता है और प्रैक्टिस करने की अनुमति प्रदान करता है। भारत का फिलीपींस के साथ इस तरीके का कोई भी समझौता नहीं है। फिलीपींस के या फिर किसी भी अन्य देश के डॉक्टरों को इस तरह से भारत में प्रैक्टिस करने की अनुमति नहीं दी जाती है। अब चूंकि फिलीपींस के डॉक्टरों को हमारे यहां प्रैक्टिस करने की अनुमति नहीं दी जाती है, तो ऐसे में फिलीपींस की ऑथोरिटीज भी भारतीय मेडिकल ग्रैजुएट्स को अपने यहां लाइसेंस नहीं देगी। अब चाहे एमडी की डिग्री वहां 4 साल की हो, साढे 4 साल की हो या फिर 5 साल की हो, वहां ड्यूरेशन का मुद्दा अब रह ही नहीं गया है। मुद्दा अब यह हो गया है कि जब आपको वहां लाइसेंस ही नहीं मिलेगा, तो वहां पर मेडिकल की पढ़ाई करने का आखिर क्या फायदा।

इन सभी के अलावा कजाकिस्तान और यूक्रेन आदि देशों से डॉक्युमेंट्स का हम अभी भी इंतजार कर रहे हैं कि हमें इस बारे में कुछ कन्फर्मेशन मिल जाए। जो भी जानकारी हमारे पास आएगी, उसे हम आपसे जल्द साझा करेंगे।

जर्मनी की स्थिति

अब हम आपको जर्मनी के बारे में बता देते हैं कि जर्मनी में जो पढ़ाई होती है, वह जर्मन भाषा में ही होती है। इसलिए आपको NExT 1 में शामिल होने की अनुमति नहीं दी जाएगी, क्योंकि आपने जर्मनी में मेडिकल की पढ़ाई जर्मन भाषा में की होगी, जबकि नियमों के मुताबिक आपकी मेडिकल की पढ़ाई अंग्रेजी भाषा में होनी चाहिए। अब इस तरह का मुद्दा सभी देशों के साथ हो गया है। चाहे आप चाइनीज सीखिए। चाहे आप रूसी भाषा सीखिए। जिस भी देश में आप जाएंगे, वहां लोकल लैंग्वेज को सीख पाना आसान नहीं है। आप यह मान कर चले कि आपको पहले से ही 6 साल लग रहे हैं, तो 1 साल यदि आप लैंग्वेज की पढ़ाई बहुत अच्छे से करते हैं, तब कहीं जाकर आपके लिए लाइसेंसिंग एग्जाम को क्वालीफाई करना संभव हो पाएगा। इस बात की भी बड़ी संभावना है कि लाइसेंसिंग एग्जाम को पास करने के बाद आप भारत न लौटें, क्योंकि जब वहां आपके पास समय बच रहा है और आपको अच्छी सैलरी भी मिल रही है, तो हमें नहीं लगता कि ऐसा करना किसी भी तरीके से लॉजिकल होगा।

एडमिशन लेने से पहले

यह बात तो साफ है कि किसी भी भाषा को सीखना कोई आसान काम नहीं होता है। न ही उन देशों की परीक्षाएं इतनी आसान होती हैं कि हर कोई इन परीक्षाओं को पास कर ले। इसलिए यदि 2022 में आप कहीं पर भी एडमिशन लेने की योजना बना रहे हैं, तो आप इस चीज के लिए पहले से अपना माइंड बना लें कि आप वहां की लैंग्वेज सीख सकते हैं या नहीं। हालांकि, अब भी कुछ उम्मीद रजिस्टर हो चुके और रजिस्टर होने योग्य में बची हुई है। यदि रजिस्टर होने योग्य का विकल्प NMC देता है, तब एक ऑप्शन मिलने की संभावना रहेगी। फिर भी यह तो तय है कि विदेश में मेडिकल की पढ़ाई करना अब पहले जैसा आसान नहीं रहा है। पहले की तरह आप वहां ड्यूरेशन को जोड़कर नहीं जा सकते हैं कि आपको वहां 5 साल की पढ़ाई करनी है, 1 साल की इंटर्नशिप करनी है। चाहे आपको 8 साल लगे, 9 साल लगे या 10 साल लगे, वहां पर लाइसेंस हासिल करने के लिए आपको वहां का लाइसेंसिंग एग्जाम पास करना ही पड़ेगा। इसके बाद भारत आकर भी आपको लाइसेंसिंग एग्जाम पास करना पड़ेगा। उसके बाद आपको 1 साल की इंटर्नशिप करनी पड़ेगी।

फिर से 2002 वाली स्थिति

तो अब आप यह मान कर चलिए कि विदेश में आप किसी भी देश में मेडिकल की पढ़ाई करने के लिए जाते हैं, तो वहां आपके कोर्स की अवधि 6 साल की होगी, जिसमें कि इंटर्नशिप भी शामिल होगी। किसी देश में यह 7 साल का भी हो सकता है, लेकिन औसत तौर पर हम 6 साल की बात कर रहे हैं। फिर जब आप भारत में इंटर्नशिप करेंगे, तो आपका 1 साल का कोर्स ड्यूरेशन और इसमें जुड़कर 7 साल हो जाएगा और यदि आपको उस देश में लाइसेंसिंग एग्जाम पास करना है, तो 1 साल वह भी आप ले लें इससे यह 8 साल हो जाता है। इसी तरह से अब 8 से 9 साल से नीचे में मेडिकल की पढ़ाई नहीं होगी। ऐसे में हम यह कह सकते हैं कि भले ही हम हैं तो 2022 में, लेकिन हम आ गए हैं 2002 में। वह इसलिए कि जब यूएसएसआर के देशों में पहले स्टूडेंट्स पढ़ने के लिए जाते थे, तो उन्हें सबसे पहले 1 साल तक रूसी भाषा पढ़नी पड़ती थी। इसके बाद वे रूसी भाषा में 6 साल तक मेडिकल की पढ़ाई करते थे। उन्हें 7 साल लग जाते थे। फिर भारत आने के बाद भी जब FMGE में शामिल होते थे, एक से दो अटेम्प्ट में उन्हें 1 से 2 साल लग जाते थे। इसके बाद 1 साल उनको इंटर्नशिप करनी पड़ती थी। इस तरह से उन्हें 8 से 9 साल लग जाते थे। अब फिर से उन्हें 8 से 9 साल ही लगने जा रहे हैं। इसके अलावा भी हमारे पास लिखित में जो भी कन्फर्मेशन आता है, उसके बारे में हम आपको जरूर बताएंगे।

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