भारतीय मेडिकल एजुकेशन की यह खासियत है कि इसका पाठ्यक्रम सबसे अच्छी तरीके से बना हुआ है। यही वजह है कि भारत में जो स्टूडेंट्स डॉक्टर बनना चाहते हैं, उनके लिए एमबीबीएस की पढ़ाई के लिए भारत ही पहली पसंद होता है। भारत में मेडिकल कॉलेजों में एडमिशन नीट की परीक्षा की मेरिट के आधार पर मिलता है।

नीट एक कॉमन प्रवेश परीक्षा है, जिसमें स्टूडेंट्स को एमबीबीएस की पढ़ाई के लिए मेडिकल कॉलेजों में दाखिला लेने के लिए शामिल होना पड़ता है। इस परीक्षा में स्टूडेंट्स की क्षमता की जांच की जाती है कि वे मेडिसिन की पढ़ाई के लायक हैं या नहीं। नीट से पहले भारत में मेडिकल और डेंटल कॉलेजों में एडमिशन के लिए एआईपीएमटी का आयोजन किया जाता था। भारत के अलग-अलग राज्य खुद की भी प्रवेश परीक्षा लेते थे।

नीट की एंट्री

वर्ष 2013 में मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया को यह महसूस हुआ कि एक कॉमन प्रवेश परीक्षा सभी स्टूडेंट्स के लिए ली जाए और इसके बाद भारत में नीट को लांच कर दिया गया।

हालांकि वर्ष 2014 और 2015 के दौरान इसका आयोजन इसलिए नहीं हो सका, क्योंकि सुप्रीम कोर्ट में कुछ याचिकाएं डाली गई थीं, जिनमें कहा गया था कि मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया एडमिशन प्रोसेस में दखलअंदाजी नहीं कर सकती है। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट की तरफ से इस पर रोक लगा दी गई थी। वर्ष 2016 में फिर से नीट का आयोजन हुआ था, लेकिन एआईपीएमटी के दो चरणों की तरह साल में दो बार इसका आयोजन हुआ था। इसके सबसे पहले चरण का आयोजन मई में हुआ था, जबकि दूसरा फेज जुलाई में आयोजित हुआ था। वर्ष 2017 में इसने पूरी तरीके से एआईपीएमटी और राज्यों के स्तर पर ली जाने वाली परीक्षाओं को रिप्लेस कर दिया था। संबंधित संस्थानों में दाखिला लेने के लिए केवल दो ही प्रवेश परीक्षाएं होती हैं, जिनमें एम्स एमबीबीएस एग्जाम और जीआईपीएमईआर एमबीबीएस एग्जाम शामिल हैं। उस साल तक नीट केवल उन लोगों के लिए ही हुआ करती थी, जो कि भारत में एमबीबीएस की पढ़ाई करना चाहते थे।

क्या विदेशों में भी एमबीबीएस के लिए नीट की है जरूरत?

फरवरी 2018 से नीट उन सभी स्टूडेंट्स के लिए अनिवार्य कर दिया गया, जो कि भारत में या फिर विदेश में एमबीबीएस की पढ़ाई करना चाहते हैं। फिर से मामला कोर्ट में पहुंचा और कई याचिकाएं डाली गईं। उस साल के लिए स्टूडेंट्स को अनुमति दे दी गई थी कि वे नीट 2019 के रिजल्ट के आने से पहले मेडिसिन कोर्स में विदेशों में दाखिला ले लें। अंततः 2019 में नीट उन सभी स्टूडेंट्स के लिए अनिवार्य कर दिया गया, जो कि मेडिकल, डेंटल और आयुष प्रोग्राम में दाखिला लेना चाहते हैं। जो कोई भी भारतीय स्टूडेंट्स भारत में या फिर विदेश में एमबीबीएस में दाखिला लेना चाहते हैं, उनके लिए नीट अनिवार्य योग्यता हो गई है।

इनके द्वारा होता है नीट का आयोजन

वर्ष 2018 तक नीट सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन द्वारा लिया जाता था, लेकिन इसके बाद यह एनटीए के हाथों में चला गया। वर्ष 2019 में नेशनल टेस्टिंग एजेंसी को इसकी जिम्मेवारी मिल गई थी, जो कि एक सरकारी निकाय है और इसका गठन ही खास तौर पर प्रवेश परीक्षाओं और नियुक्ति के लिए होने वाली परीक्षाओं के लिए हुआ था। एनटीए द्वारा सबसे पहली बार नीट की परीक्षा वर्ष 2019 में अंडर ग्रेजुएट मेडिकल पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए ली गई थी।

नीट का पैटर्न

नीट की परीक्षा अभी तक ऑफलाइन मोड में ही ली जा रही है, जबकि इसके ऑनलाइन एग्जामिनेशन के लिए काफी अनुरोध लगातार मिल रहे हैं। नीट की परीक्षा वर्ष में केवल एक बार ली जाती है। यह परीक्षा एमसीक्यू पैटर्न पर होती है और ओएमआर फॉर्मेट में इसे पूरा करना होता है। नीट में फिजिक्स, केमिस्ट्री और बायोलॉजी के 180 सवाल कुल 720 अंकों के होते हैं। हर सही उत्तर के लिए एक अंक मिलता है, जबकि हर गलत उत्तर के लिए एक अंक काट लिया जाता है।

नीट का आयोजन देशभर में अलग-अलग केंद्रों पर होता है। इसकी अवधि 3 घंटे की होती है। परीक्षा का आयोजन 11 अलग-अलग भाषाओं में होता है।

नीट के लिए योग्यता

भारत के मेडिकल कॉलेजों में एडमिशन के लिए नीट एक अनिवार्य योग्यता तो थी ही, वर्ष 2019 से विदेशों में भी एमबीबीएस की पढ़ाई के लिए इसे एक अनिवार्य योग्यता बना दिया गया था। इसका मतलब यह हुआ कि अब केवल नीट क्वालीफाइड स्टूडेंट्स ही भारत व विदेश में एमबीबीएस की पढ़ाई कर सकते हैं।

भारत में नीट के मेरिट के आधार पर ही एडमिशन मिलते हैं। वहीं, विदेशों में एमबीबीएस में एडमिशन सिर्फ इस आधार पर मिल जाता है कि स्टूडेंट्स नीट की परीक्षा पास कर चुके हैं। कई देश ऐसे भी हैं जो नीट में अच्छे अंक लाने वाले स्टूडेंट्स को ज्यादा लाभ देते हैं। चीन में एमबीबीएस के दौरान उन स्टूडेंट्स को स्कॉलरशिप दी जाती है, जिन्होंने कि नीट में 200 या इससे ज्यादा स्कोर हासिल किए हैं।

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