फॉरेन मेडिकल ग्रैजुएट लाइसेंटशिएट 2021 को लेकर जो सुप्रीम कोर्ट में पिटीशन दाखिल की गई थी, उसे लेकर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आ गया है। सबसे पहले मद्रास हाईकोर्ट में यह पिटिशन दाखिल की गई थी। हालांकि, मद्रास हाईकोर्ट ने इस मामले में किसी भी तरह की कोई राहत नहीं दी थी। ऐसे में याचिकाकर्ता सुप्रीम कोर्ट पहुंच गए थे और वहां उन्होंने यह पिटीशन दाखिल कर दी थी।

कोर्स ड्यूरेशन और इंटर्नशिप को लेकर कोई राहत नहीं

अब इस पिटीशन पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने जो आदेश दिया है, उसमें सुप्रीम कोर्ट द्वारा नेशनल मेडिकल कमीशन के फॉरेन मेडिकल ग्रैजुएट्स लाइसेंटशिएट 2021 के जो प्रावधान हैं कि 54 महीने से कम के एमबीबीएस को भारत में नेशनल मेडिकल कमीशन मान्यता नहीं देगा और इस तरह की डिग्री प्राप्त करने वालों को भारत में प्रैक्टिस करने की अनुमति नहीं मिलेगी, इसे यथावत रखा गया है। प्रावधान में यह भी है कि  जिस देश में आपने एमबीबीएस की पढ़ाई की है, वहां पर आपको 1 साल की इंटर्नशिप करनी पड़ेगी। इसके बाद भारत लौटने पर भी आपको NExT 1 क्वालीफाई कर लेने के बाद यहां भी 1 साल की कंपलसरी टोटेटरी इंटर्नशिप करनी पड़ेगी। इसे भी सुप्रीम कोर्ट ने पहले की तरह ही रखा है।

भाषा और लाइसेंसिंग को लेकर भी राहत नहीं

इसके अलावा एक प्रावधान यह भी था कि आप जिस भी मेडिकल इंस्टिट्यूट में पढ़ाई कर रहे हैं, वहां पर मेडिकल की पढ़ाई का माध्यम अंग्रेजी भाषा ही पूरी तरह से होनी चाहिए। इसके अतिरिक्त एक और सबसे महत्वपूर्ण प्रावधान यह था कि आप जिस देश में भी मेडिकल की पढ़ाई कर रहे हैं या जहां से आप मेडिकल की डिग्री ले रहे हैं, वहां पढ़ाई पूरी हो जाने के बाद वहां की जो भी कंपीटेंट अथॉरिटी है, जिस तरह से भारत में नेशनल मेडिकल कमीशन है, उसी तरह की वहां लाइसेंसिंग एग्जाम को कराने वाली एवं रजिस्ट्रेशन प्रदान करने वाली अथॉरिटी की ओर से बिल्कुल लोकल स्टूडेंट्स की तरह ही आपको भी लाइसेंस मिलना चाहिए। आपके पास प्रैक्टिस करने के अधिकार होने चाहिए। इन प्रावधानों को लेकर भी सुप्रीम कोर्ट की तरफ से अपने फैसले में कोई भी राहत नहीं दी गई है।

ऐसे में नहीं मिलेगी NEXT 1 में बैठने की अनुमति

यदि आप ऐसे देश में एडमिशन लेते हैं, जहां पर कि कोर्स ड्यूरेशन 54 महीने से कम है, तो आपको NExT 1 में बैठने की परमिशन नहीं दी जाएगी। यदि आप मेडिकल की पढ़ाई इंग्लिश के अलावा और किसी भी लैंग्वेज में करते हैं, तब भी आपको NExT 1 में शामिल होने की अनुमति नहीं दी जाएगी। यदि आप अपनी मेडिकल की पढ़ाई के दौरान कॉलेज बदलते हैं, तब भी आपको NExT 1 में बैठने की परमिशन नहीं मिलेगी। यदि आप जिस देश से मेडिकल एजुकेशन पूरी कर चुके हैं, वहां पर आपका रजिस्ट्रेशन नहीं है और आपके पास वहां का लाइसेंस नहीं है, तो वैसी स्थिति में भी आपको किसी भी तरीके की राहत नहीं दी जाएगी।

सुप्रीम कोर्ट की बड़ी टिप्पणी

कुल मिलाकर फॉरेन मेडिकल ग्रैजुएट लाइसेंटशिएट 2021 को लेकर विदेश जाकर मेडिकल की पढ़ाई करने वाले ग्रैजुएट्स ने जितने भी सवाल उठाए थे, इन्हें लेकर सुप्रीम कोर्ट की तरफ से उन्हें किसी भी तरह की कोई राहत प्रदान नहीं की गई है। इसे लेकर सुप्रीम कोर्ट ने यह कहा है कि देश को डॉक्टरों की जरूरत इस वक्त जरूर है, लेकिन साथ में देश को क्वालिटी डॉक्टरों की भी आवश्यकता है। विदेश जाकर छोटे-छोटे संस्थानों में पढ़कर आप डिग्री लेकर आ रहे हैं, मगर उस देश में प्रैक्टिस करने के लिए आप लाइसेंस नहीं पा सकते, तो आपके पास इस देश में भी मेडिकल की प्रैक्टिस करने का कोई अधिकार नहीं है।

एडमिशन लेने से पहले इसका रखें ध्यान

इसलिए जो भी स्टूडेंट्स 2022 में विदेश में मेडिकल की पढ़ाई करने की योजना बना रहे हैं या 2022 के जनवरी या फरवरी में वे वहां एडमिशन ले चुके हैं और उनकी क्लासेस अभी शुरू नहीं हुई हैं, साथ ही वे गजट नोटिफिकेशन के दायरे में आते हैं, तो आप उन देशों को देख लें जहां कि आपको लाइसेंस मिलेगा या नहीं मिलेगा। वह इसलिए कि कुछ देश ऐसे हैं, जहां पर कि आपको लाइसेंस नहीं मिलता है। आप अपनी मेडिकल की डिग्री पूरी कर सकते हैं और आप भारत आकर पढ़ सकते हैं और यहां पर प्रैक्टिस कर सकते हैं, लेकिन आपको उस देश में प्रैक्टिस करने का लाइसेंस नहीं मिलेगा। किन जिन देशों में प्रैक्टिस करने का लाइसेंस मिलता है, कोर्स ड्यूरेशन कितने समय का होगा, इस गैजेट के बाद क्या-क्या बदलाव आए हैं, इन सारी चीजों के बारे में हम आपको अलग-अलग ब्लॉग में बताने की कोशिश जरूर करेंगे।

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