दवाओ मेडिकल स्कूल फाऊंडेशन के जो इंडियन कैम्पसेस हैं, उनके बारे में कुछ ऐसी बातें हैं, जिनके बारे में अब तक ज्यादा चर्चा नहीं हो पाई है या फिर इन बातों पर उतना ध्यान नहीं दिया गया है, जितना कि दिया जाना चाहिए था। ऐसे में इस आर्टिकल में हम आपका ध्यान दवाओ मेडिकल स्कूल फाऊंडेशन के भारत में मौजूद कैंपस की ओर खींच रहे हैं।

जैसे कि पहले भी हम आपको यह बता चुके हैं कि जिन स्टूडेंट्स का एडमिशन दवाओ का नाम लेकर बीएस कोर्स में किया गया है, दरअसल उनका एडमिशन दवाओ में हुआ ही नहीं है। अब तो वहां के मैनेजमेंट ने भी इस बात को मान लिया है कि इन स्टूडेंट्स का एडमिशन वहां नहीं हुआ है। यानी कि उनका रजिस्ट्रेशन दवाओ में है ही नहीं। बड़े ताज्जुब की बात है कि स्टूडेंट्स को दवाओ मेडिकल स्कूल फाऊंडेशन में एडमिशन का लेटर दे दिया गया है। आखिर जब दवाओ में स्टूडेंट्स का एडमिशन हुआ ही नहीं, तो उन्हें ऐडमिशन लेटर किस तरह से जारी कर दिया गया? यह वास्तव में बड़ी ही हैरान करने वाली बात है।
दूसरी चीज यह है कि आखिर इस बात की क्या गारंटी है कि इसके बाद स्टूडेंट्स का एडमिशन एमडी में हो जाएगा? धोखे में रखकर दवाओ मेडिकल स्कूल फाऊंडेशन का दावा करके स्टूडेंट्स का बीएस कोर्स गुयाना की यूनिवर्सिटी से कराया जा रहा है। हालांकि, जहां तक हमारा विश्लेषण है हम आपको बता दें कि लगभग 70 फ़ीसदी स्टूडेंट्स ऐसे होंगे, जिन्हें कि एमडी में वहां एडमिशन नहीं मिल पायेगा। आखिर आपको वहां पर एडमिशन क्यों नहीं मिलेगा, इसका जवाब आपको अपने मैनेजमेंट से मांगना चाहिए, जो कि समय-समय पर जूम मीटिंग में स्टूडेंट्स को मोटिवेट करते रहते हैं। उन्हें यह कहते रहते हैं कि कंसल्टेंट्स आपको भड़काने का काम कर रहे हैं। उनकी बातों को आप मत सुनिए। इस पर हमारा यह कहना है कि यदि सच बोलने को आप भड़काना कहते हैं, तो फिर भड़काना आखिर क्या होता है?
साथ ही बहुत से कंसल्टेंट्स, जो कि नए-नए देशों में एडमिशन दिलाने की बात कर रहे हैं, उनसे हमारी यही अपील है कि वे सबसे पहले उन स्टूडेंट्स के एडमिशन को जस्टिफाई करवा दें, जो कि उन्होंने पहले से ही करवाये हुए हैं। उनको वे इस बात का भरोसा दिलवा दें कि उनका बीएस में तो एडमिशन नहीं हो पाया, लेकिन एमबीबीएस में हो जाएगा।
ऐसे में एक बार फिर से सभी स्टूडेंट्स और पैरेंट्स से हमारी यही अपील है कि अपने कंसल्टेंट्स से जब तक आप लिखित में या फिर स्टाम्प पेपर पर यह नहीं ले लें कि यदि एमडी में उनका एडमिशन नहीं होता है, तो आप बीएस के सारे पैसे उनसे वापस ले लेंगे, तब तक आप इस दिशा में आगे न बढ़ें। हालांकि, शर्त यह है कि नेशनल मेडिकल कमिशन (एनएमसी) बीएस की डिग्री को वैलिड कर दे। यदि एनएमसी ऐसा नहीं करती है, तो इसकी वजह से हजारों स्टूडेंट्स का भविष्य खतरे में पड़ जाएगा।
इस बात की पूरी संभावना है कि लगभग सभी पैरेंट्स 2 साल के बीएस के लिए अब तक 12 से 13 लाख रुपए खर्च कर दिए होंगे। ऐसे में इनके पास और कोई विकल्प नहीं बचेगा कि वे अपने बच्चों को फिर कहां भेजेंगे। इसलिए जो स्टूडेंट्स यहां इंडियन कैंपस में पढ़ रहे हैं, उनके लिए ये बातें बेहद ध्यान देने योग्य हैं। आपके मन में यदि किसी भी तरह का डाउट है, तो आप कमेंट बॉक्स में या चैट बॉक्स में आकर हमसे पूछ सकते हैं। आपकी मदद करके हमें हमेशा ही खुशी का अनुभव होता है।
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