विदेशों से एमबीबीएस की पढ़ाई करना इन दिनों स्टूडेंट्स के बीच लोकप्रिय होता जा रहा है, क्योंकि भारत में एमबीबीएस की पढ़ाई बहुत ही महंगी है। भारत में डॉक्टरों की मांग तो बहुत है, लेकिन डॉक्टरों की सप्लाई बहुत ही कम है। ऐसी परिस्थिति में डॉक्टरों की मांग जो लगातार बढ़ती ही जा रही है, उसे पूरा करने के लिए और उसके मुताबिक पढ़ाई करने के लिए कि उनका पॉकेट भी उन्हें इसकी अनुमति दे सके, स्टूडेंट्स विदेशों का रुख कर रहे हैं। हर साल NEET में शामिल होने वाले आवेदकों की तादाद लगातार बढ़ती ही जा रही है। उसी तरीके से विदेशों में एमबीबीएस के लिए आवेदन करने वाले स्टूडेंट्स की संख्या में भी इजाफा देखने को मिल रहा है। हर साल 9-10 हजार से भी ज्यादा स्टूडेंट्स मेडिसिन की पढ़ाई के लिए दूसरे देशों में जा रहे हैं।

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विदेशों में एमबीबीएस के लिए कौन कर सकते हैं आवेदन?

सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि विदेश में एमबीबीएस के लिए कौन आवेदन कर सकते हैं या फिर एमबीबीएस की पढ़ाई विदेश से करने के लिए क्या-क्या योग्यताएं होनी चाहिए। कई यूनिवर्सिटीज विदेशों में ऐसी भी हैं, जो कम अंक पाने वाले स्टूडेंट्स को भी अच्छे अवसर देती हैं, ताकि वे डॉक्टर बनने के अपने सपने को साकार कर सकें। विदेशों में जो स्टूडेंट्स आवेदन करना चाहते हैं, उनके लिए आवेदन करने वाले वर्ष में 31 दिसंबर तक न्यूनतम 17 साल की आयु पूरी करना जरूरी होता है। उनके लिए 12वीं में फिजिक्स, केमिस्ट्री और बायोलॉजी पढ़ना अनिवार्य होता है। साथ ही इस परीक्षा को 50% अंकों के साथ उत्तीर्ण भी करना होता है। अंग्रेजी पढ़ना भी जरूरी होता है। इसके अलावा भारत के जो स्टूडेंट्स भारत में या विदेश में पढ़ाई करना चाहते हैं, उनके लिए नीट परीक्षा को पास करना अनिवार्य होता है। जो स्टूडेंट्स NEET क्वालीफाई नहीं करते हैं, डिग्री कंप्लीट हो जाने के बाद भारत में वे प्रैक्टिस करने के योग्य नहीं होते हैं।

विदेशों में एमबीबीएस पर कितना खर्च आता है?

यदि आप यह सोच रहे हैं कि एमबीबीएस में पढ़ाई करना उनके लिए ही अच्छा है, जिनके पास अच्छा बैंक बैलेंस है तो आप गलत हो सकते हैं। यह बात सही है कि अपने ग्रेजुएशन को अच्छी तरीके से पूरा करने के लिए आपको अपने फाइनेंस को लेकर पहले से प्लानिंग करनी पड़ती है, लेकिन कई ऐसे देश है जो कि आपके बजट में ही आपको पढ़ाई करने की सुविधा देते हैं। विदेशों से एमबीबीएस की पढ़ाई करने में औसत तौर पर कम-से-कम 25 लाख रुपये खर्च होते हैं। इसलिए सबसे पहले आपको अपने बजट की प्लानिंग कर लेनी चाहिए। उसके बाद आपको अपने बजट में उन देशों की खोज करनी चाहिए, जहां कि यूनिवर्सिटीज एमबीबीएस की पढ़ाई करवाती हों। यदि आपको यह फैसला लेने में दिक्कत हो रही है कि आपको कहां आवेदन करना चाहिए, तो आप जगविमल कंसल्टेंट्स के विशेषज्ञों से जुड़ सकते हैं, जो आपका मार्गदर्शन करेंगे और आपके सारे सवालों के जवाब भी देंगे।

विदेशों में एमबीबीएस की पढ़ाई के लिए कौन-से देश हैं सबसे सस्ते?

जैसा कि पहले भी बताया गया है कि विदेशों में एमबीबीएस की पढ़ाई 25 लाख रुपये से शुरू होती है और यह उस सीमा के बाहर भी जा सकती है, जितना कि आप खर्च करना चाहते हैं। यहां कुछ देशों के बारे में हम आपको बता रहे हैं, जो कि सस्ती कीमत पर एमबीबीएस की पढ़ाई ऑफर करते हैं।

कजाकिस्तान

कजाकिस्तान में एमबीबीएस की पढ़ाई 5 वर्षों की है। कजाकिस्तान में इसकी पढ़ाई के साथ यहां रहने और बाकी खर्च मिलाकर 25 लाख रुपये में कवर किए जा सकते हैं। कजाकिस्तान में विश्वविद्यालयों की औसत सालाना फीस 3500 से 4000 USD है। हॉस्टल पर सालाना 500 से 600 USD का खर्च आता है। उसी तरह से खाने-पीने पर प्रति महीने 100 से 120 USD का खर्च आता है। कजाकिस्तान सस्ती कीमत पर 5 साल के एमबीबीएस प्रोग्राम के लिए स्टूडेंट्स के बीच लोकप्रिय होता जा रहा है।

चीन

चीन में एमबीबीएस के पाठ्यक्रम की अवधि 5+1 वर्ष है, जहां पर कि 5 साल पढ़ाई के लिए और 1 साल इंटर्नशिप के लिए है। चीन में एमबीबीएस की पढ़ाई कम-से-कम 29 से 30 लाख रुपये में की जा सकती है। आप किस यूनिवर्सिटी का चयन करते हैं और उसकी फीस क्या है, इसके आधार पर यह खर्च बढ़ भी हो सकता है। चीन के मेडिकल विश्वविद्यालयों में औसत फीस सालाना 30 हजार RMB और सालाना हॉस्टल फ्री 4500 से 5000 RMB होती है। खाने-पीने का खर्च यहां कजाकिस्तान की ही तरह लगभग 100 से 120 USD प्रति महीने आता है। चीन भारतीय स्टूडेंट्स के बीच लोकप्रिय है, क्योंकि यह स्कॉलरशिप भी ऑफर करता है और चीन में भारतीय स्टूडेंट्स द्वारा की गई इंटर्नशिप हमारे देश में भी वैध मानी गई है।

रुस/यूक्रेन

रुस और यूक्रेन में एमबीबीएस कोर्स की अवधि 6 साल की है। इन देशों के विश्वविद्यालयों में एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी कर लेने के बाद स्टूडेंट्स को भारत में इंटर्नशिप करनी पड़ती है। इन दोनों देशों में एमबीबीएस प्रोग्राम को पूरा करने के लिए औसत खर्च 28 से 30 लाख रुपये आता है। यहां की मेडिकल यूनिवर्सिटीज की औसत सालाना फीस 4000 USD और हॉस्टल फीस 500 से 600 USD होती है। खाने-पीने पर हर महीने लगभग 100 से 120 USD खर्च होते हैं। रुस में कई सदियों पुराने इतिहास वाले यूनिवर्सिटी मौजूद हैं। साथ ही टीचिंग के अनुभव के मामले में भी ये विश्वविद्यालय बहुत आगे हैं। यूक्रेन में अपनी डिग्री पूरी करने के लिए स्टूडेंट्स को KROK 1 और KROK 2 परीक्षाओं को पास करना पड़ता है।

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