विदेश से डॉक्टरी करने वाले युवाओं के सपनों की उम्मीदों पर प्रदेश के कई कन्सलटेंट कैची चला रहे है। दरअसल, एमसीआई ने पिछले दिनों एक आदेश जारी कर पांच जून तक विदेश में डॉक्टरी की पढ़ाई में दाखिला लेने पर नीट की अनिवार्यता लागू नहीं होने की बात कही थी।

इस आदेश के बाद से विदेश से डॉक्टरी करने वाले युवाओं के अरमान फिर से जग गए है। लेकिन कुछ कन्सलटेंट अपने फायदे के लिए युवाओं को गुमराह करने पर तुले है। प्रदेश के कई कन्सलटेंट से बातचीत की थी उन्होंने दावा ·किया की जून से पहले विदेश से डॉक्टरी पाठ्यक्रम में प्रवेश दिला देंगे।

जबकि हकीकत यह है कि विदेशों के ज्यादातर मेडिकल कॉलेज में सितंबर से पहले कोई पढ़ाई ही शुरू नहीं होती है। ऐसे में कई कन्सलटेंट बच्चों को फिलहाल भाषा व प्री मेडिकल के पाठ्यक्रम में प्रवेश दिला रहे है। जबकि एमसीआई ने अपने आदेश में साफ तौर पर बताया है कि पांच जून से पहले डॉक्टरी की पढ़ाई में प्रवेश लेना है।

तो नहीं होगी डिग्री मान्य एक्सपर्ट के अनुसार चीन की कैपिटल मेडिकल यूनिवर्सिटी मे पहले प्री मेडिकल पढऩा होता है और उसका मेडिकल का कोर्स सितंबर में शुरू होता है ।

ऐसे मे यदि कोई छात्र अभी वहां बिना नीट पास किए 5 जून से पहले जाता है तो मेडिकल कौंसिल ऑफ इंडिया के नए नोटिस के अनुसार डिग्री मान्य नही होगी। ऐसे है रूस के अधितकर यूनिवर्सिटीज मे कोर्स सितंबर और अक्टूबर में शुरू होता है लेकिन अपने फायदे के लिए कन्सलटेंट छात्रों के भविष्य से खेलने से भी नही चूक रहे।

युवाओं को ऐसे दिया जा रहा है झटका

कई देश भाषा व प्री मेडिकल के ऑफर लेटर में भी छह से साढ़े छह साल के डॉक्टरी के पाठ्यक्रम का जिक्र करते है।

ऐसे में युवा भ्रमित होकर भाषा व प्री मेडिकल को ही डॉक्टरी में प्रवेश मान लेते है, जबकि ज्यादातर देशों में ऐसा नहीं है। एक्सपर्ट का कहना है कि विदेश में अभी जाने वाले छात्रों को सितंबर में प्रवेश मिलेगा। दूसरी तरफ एमसीआई ने पांच जून की तिथि दी है। ऐसे में जब पाठ्यक्रम पूरा कर छात्र आएंगे तो डिग्री को लेकर सवाल खड़े होंगे। यदि एमसीआई तिथि बढ़ाती है तो राहत मिल सकती है।

एक्सपर्ट व्यू

एक्सपर्ट वेद प्रकाश बेनीवाल ने बताया कि कई कन्सलटेंट युवाओं को गुमराह कर भविष्य खराब करने पर तुले है। एमसीआई के आदेश और ऑफर लेटर की भाषा को सही ढंग से नहीं समझने के कारण अभ्यर्थी इनके जाल में फंस रहे है। दुनिया के ज्यादातर देशों में सितंबर महीने में डॉक्टरी की पढ़ाई के लिए प्रवेश होते है। जबकि एमसीआई ने पांच जून तक का समय दिया है।

एमसीआई ने एक साल में कई बार बदले आदेश

विदेश से डॉक्टरी की पढ़ाई करने वाले विद्यार्थियों के लिए एमसीआई के आदेश पिछले एक साल में कई बार बदले। मार्च 2018 में एमसीआई ने स्पष्ट किया कि भारत या विदेश से डॉक्टरी की पढ़ाई करने वाले अभ्यर्थियों का नीट पास होना जरूरी है। इसके लिए अंतिम तिथि एक मई 2018 दी गई। इस बीच कुछ अभ्यर्थियों ने न्यायालय की शरण ली। याचिका में बताया इस साल अभ्यर्थी एमसीआई की गाइडलाइन को पूरी तरह नहीं समझ सके, इसलिए विदेशी संस्थानों से डॉक्टरी की पढ़ाई करने वालों को इस सत्र में छूट दी जाए। इसके बाद फिर एमसीआई की ओर से याचिकाकर्ताओ को छूट दी गई।

अब यह तीन अहम बदलाव हुए

1.) एक साल नीट की परीक्षा पास करने के बाद नीट का स्कोर तीन साल तक वैध माना जाएगा। इस दौरान वह डॉक्टरी की पढ़ाई के लिए कही भी दाखिला ले सकते है।

2.) भारतीय मूल के या विदेशी छात्र जून 2019 के बाद नीट की परीक्षा पास करने के बाद ही भारतीय या विदेश चिकित्सा संस्थान में मेडिकल शिक्षा हासिल कर सकेंगे।

3.) भारतीय या विदेशी मूल के छात्र जो नीट 2018 में फेल हुए या शामिल नहीं होने वाले छात्र भी पांच जून से पहले किसी भी संस्थान में प्रवेश के योग्य माने जाएंगे। लेकिन एक अर्हता प्रमाण पत्र लेना होगा।

4.) 2019 में जिन छात्रों ने नीट की परीक्षा उत्तीर्ण करने के पश्चात विदेशों में प्री मेडिकल, भाषा व डॉक्टरी की पढ़ाई के लिए प्रवेश लिया उनको यहां आने के बाद दुबारा नीट की परीक्षा नहीं देनी होगी।

 

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