FMG's 2021 के लिए नए नियम: अलग-अलग देशों में कोर्स की अवधि पर यूं पड़ेगा असर

नेशनल मेडिकल कमिशन (फॉरेन मेडिकल ग्रैजुएट्स लाइसेंशिएट रेगुलेशंस) 2021 को जारी तो कर दिया गया है, लेकिन बहुत से लोगों को यह नहीं मालूम है कि इसके लागू हो जाने के बाद किस देश पर क्या असर पड़ने वाला है। सबसे पहले तो आपको यह जान लेना चाहिए कि विदेश में एमबीबीएस की अवधि 3 तरह की है। इनमें 4 साल का एमबीबीएस, 5 साल का एमबीबीएस और 6 साल का एमबीबीएस शामिल हैं।

4 साल का एमबीबीएस

सबसे पहले हम शुरुआत करते हैं 4 साल के एमबीबीएस वाले देशों से। इनमें कैरेबियन आइसलैंड्स के देश और फिलिपींस शामिल हैं। दोनों देशों को देखें तो हम पाते हैं कि ज्यादा स्टूडेंट्स फिलिपींस का ही रुख करते हैं। अब जो रेगुलेशन आया है, उसके मुताबिक एमबीबीएस की न्यूनतम अवधि 54 महीने की यानी कि साढ़े 4 साल की कर दी गई है। ऐसे में फिलीपींस में मेडिकल की पढ़ाई करके जिन्होंने भी मेडिकल की डिग्री हासिल की है, वे चिंता में पड़ गए हैं कि कहीं उन्हें इसकी वजह से आगे कोई परेशानी तो नहीं होने वाली है। हालांकि, देखा जाए तो भारत सरकार की तरफ से कभी किसी स्टूडेंट्स को परेशान नहीं किया गया है। साथ ही भारत सरकार ने हमेशा स्टूडेंट्स के हित में ही कदम उठाए हैं।

हर साल लगभग 5 हजार भारतीय स्टूडेंट्स फिलिपींस से मेडिकल की पढ़ाई तो करते ही हैं। इस तरीके से 4 साल में 20 हजार स्टूडेंट्स हो जाते हैं। यदि सभी लोग मिलकर भारत सरकार के सामने इसे लेकर अपना पक्ष रखते हैं, तो इस बात की पूरी संभावना है कि सरकार उनकी बातों को सुनेगी। अब सरकार यदि यह 4 साल वाली अवधि को मान लेती है, तो ऐसे में फिलिपींस या कैरेबियन आइसलैंड्स में स्टूडेंट्स 2 साल का बीएस कोर्स करेंगे। इसके बाद उन्हें 4 साल की एमडी की पढ़ाई करनी पड़ेगी। इसके बाद 1 साल का इंटर्नशिप भी होगा। जब ये सारी चीजें हो जाएंगी, तो भारत आने के बाद स्टूडेंट्स को यहां नेशनल एग्जिट टेस्ट (NEXT) को पास करना पड़ेगा। यहां भी उन्हें फिर इंटर्नशिप करनी पड़ेगी। इस तरीके से कुल मिलाकर साढ़े 8 से 9 साल उन्हें लग जाएंगे।

5 साल का एमबीबीएस

अब जब हम 5 साल वाले एमबीबीएस की पढ़ाई वाले देशों की बात करते हैं, तो इनमें कजाकिस्तान, उज्बेकिस्तान, तजाकिस्तान, किर्गिस्तान और मलयेशिया जैसे देश शामिल हैं। मलयेशिया की कुछ यूनिवर्सिटीज, जिनसे हमारी बातचीत हुई है, उससे यह पता चला है कि वे संभवतः 5 साल के कोर्स के पूरा हो जाने के बाद 1 साल की इंटर्नशिप भी करवाएंगे। इसके बाद वे अपने स्टूडेंट्स को वापस भेज देंगे। उसी तरह से कजाकिस्तान, कजाकिस्तान, उज्बेकिस्तान और किर्गिस्तान जैसे देशों में भी 5 साल के कोर्स के बाद 1 साल की इंटर्नशिप जोड़ दी जाएगी। इसके बाद आप भारत लौट कर भी 1 साल का इंटर्नशिप करेंगे। इस तरीके से आपके एमबीबीएस कोर्स की अवधि 7 साल की हो जाएगी।

6 साल का एमबीबीएस

अब जब हम 6 साल की अवधि के एमबीबीएस पाठ्यक्रम वाले देशों की बात करते हैं, तो इनमें जॉर्जिया, यूक्रेन, रुस, बेलारुस और अर्मेनिया आदि देश शामिल हैं। इन देशों में जो 6 साल का एमबीबीएस का कोर्स है, उसे लेकर कंसल्टेंट्स या संबंधित ग्रुप्स वहां की अथॉरिटीज को इस बात के लिए मनाने की कोशिश करेंगे कि वे छठे साल को इंटर्नशिप के तौर पर दिखा दें।

हालांकि, सभी देशों के अलग-अलग नियम होते हैं। उनके बारे में और ज्यादा गहराई में जाकर हमें देखना पड़ेगा। सभी देशों की भाषा भी अलग-अलग होती है। ऐसे में हो सकता है कि इसमें थोड़ा समय लग जाए। फिर भी हमारी ओर से कोशिश यही है कि जितनी ज्यादा हो सके, हम आप तक सही जानकारी ही पहुंचाएं। इसलिए यदि आप विदेश में 6 साल का एमबीबीएस कर रहे हैं, तो ऐसे में आप इसे 5+1 में बांट सकते हैं। भारत आकर आप फिर 1 साल का इंटर्नशिप कर सकते हैं। इस तरीके से आपको कुल 7 साल लगेंगे।

बांग्लादेश, नेपाल और चीन में

अब उन देशों की बात करते हैं, जहां इस बिल के हिसाब से या फिर इस गजट के नोटिफिकेशन के मुताबिक ही एमबीबीएस कोर्स की अवधि है। इनमें बांग्लादेश, नेपाल और चीन शामिल हैं। इन देशों में किसी भी तरह के मॉडिफिकेशन की जरूरत नहीं है। इन देशों में आपको 5 साल + 1 साल यानी कि 6 साल पढ़ना है। भारत लौटने के बाद आपको NEXT में शामिल होना है। इसके बाद आपको 1 साल की इंटर्नशिप करनी है। कुल मिलाकर आप देख सकते हैं कि भारत में आपकी एमबीबीएस कोर्स की अवधि साढ़े 5 साल की होगी। विदेशों में उन देशों में यह अवधि 6 साल 8 महीने या 6 साल 9 महीने की होगी, जहां पर कि आपकी डिग्री 5 साल की या फिर 6 साल की है, मगर जहां पर 4 साल की एमडी की अवधि है, सरकार यदि उसे मान लेती है, तो कोर्स की यह अवधि बढ़कर साढ़े आठ से 9 साल तक पहुंच जाएगी।

घबराने की नहीं है जरूरत

अब अगली चीज जो हमारे सामने आती है, वह यह है कि 2023 में जो NEXT लागू होगा, तो जो पुराने 2018 के या 2019 के स्टूडेंट्स हैं, उनके लिए भी योग्यता यही रखी जाएगी कि उन्हें उन देशों से 1 साल की इंटर्नशिप करके ही लौटना है। साथ ही जो स्टूडेंट्स वहां पढ़ाई कर रहे हैं, उन्हें घबराने की जरूरत बिल्कुल भी नहीं है। इसके अलावा जो स्टूडेंट्स वहां जाने वाले हैं या एक माह पहले वहां एडमिशन लिया है, उनके पास अभी भी मौका मौजूद है। वे दोबारा सोच सकते हैं कि उन्हें 6 साल की एमडी की अवधि वाले देश में पढ़ाई करने के लिए जाना है या फिर 5 साल की अवधि के पाठ्यक्रम वाले देश में। हालांकि, ज्यादातर देशों की 5 या 6 साल वाले एमबीबीएस पाठ्यक्रम की अवधि एक जैसी ही हो सकती है। बाकी सभी लोग अपने बिजनेस को बचाने की, स्टूडेंट्स का भविष्य बचाने की और पैरेंट्स के पैसे बचाने की पूरी कोशिश करेंगे। बाकी और भी जो अपडेट्स हमें मिलती है, उन्हें हम आपके साथ जरूर शेयर करते रहेंगे।

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